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भोजशाला परिसर के बाहर नमाज की जगह को लेकर फिर विवाद, मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

 Reported By: Anurag Amitabh Written By: Shakti Singh
 Published : Jul 17, 2026 04:49 pm IST,  Updated : Jul 17, 2026 06:27 pm IST

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पास नमाज की जमीन देने की बात कही थी। हालांकि, प्रशासन उन्हें दो किलोमीटर दूर नमाज पढ़ने की जगह दे रहा है। वहीं, प्रशासन के अनुसार पास में कोई जगह उपलब्ध नहीं है।

Bhojshala Complex- India TV Hindi
भोजशाला परिसर Image Source : PTI

मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला परिसर के बाहर नमाज की जगह को लेकर विवाद हो गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रशासन मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने के लिए भोजशाला परिसर के पास जमीन देगा। यह अस्थायी व्यवस्था अंतिम फैसला आने तक के लिए की गई है। हालांकि, प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष को दो किलोमीटर दूर नमाज पढ़ने के लिए जमीन दी है। इससे लोगों में नाराजगी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने मुस्लिमों को जुमे की नमाज के लिए "चालीस पीर" परिसर की जमीन दी है। हालांकि, मुस्लिम समाज का कहना है कि कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पास नमाज की जगह देने का आदेश दिया था, लेकिन उन्हें 2 किमी दूर जगह दी गई है। मुस्लिम पक्ष ने चालीस पीर दरगाह नमाज पढ़ने से मना कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।

बैठक के बाद तय हुई जमीन

धार जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच आज बैठक के बाद जिला प्रशासन ने हर शुक्रवार को 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए चालीस पीर परिसर जगह देने का फैसला किया है प्रशासन का कहना है कि बैठक में चर्चा के बाद धार के ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 की जमीन, जो "चालीस पीर" के पास है, नमाज के लिए उपलब्ध कराई गई है। जो सबसे उपयुक्त और निकटतम भूमि थी। सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई 5 अगस्त 2026 को होगी।

एडीएम का बयान

धार एडीएम से जब पूछा गया कि क्या ये नमाज की जमीन एएसआई के 300 मीटर के संरक्षित दायरे में है। तो जवाब में एडीएम ने कहा कि उनकी जानकारी में ये 300 मीटर के दायरे में नहीं है, और वैसे भी 300 मीटर के अंदर कोई भूमि उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि आज नमाज हो पाई या नहीं। फैसला करीब 1 घंटा पहले ही हुआ था और मुस्लिम पक्ष को बता दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष

मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी मुस्लिम समाज सदर में अब्दुल समद का कहना है सुप्रीम कोर्ट ने मौला कमाल मस्जिद परिसर के बगल में या सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का आदेश दिया था, वो भी 1 से 3 बजे के बीच। लेकिन कलेक्टर ने 3 घंटे तक इंतजार करवाया और आखिर में एक कागज देकर कहा कि नमाज के लिए लगभग 2 किलोमीटर दूर चालीस पीर दरगाह के पास जगह दी जा रही है। जबकि कोर्ट ने साफ "मस्जिद से सटी हुई जगह" कहा था, न कि 2 किमी दूर। ये आदेश का गलत इंटरप्रिटेशन है। 700 साल से चली आ रही परंपरा को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन हो रहा है। इसको लेकर मुस्लिम पक्ष ने लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है। सभी पिटीशनर्स के साथ मिलकर वकीलों से चर्चा के बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में फिर से चैलेंज करेंगे।

चालीस पीर पर नमाज नहीं पढ़ेगा मुस्लिम पक्ष

अब्दुल समद से जब पूछा गया कि क्या अगला आदेश आने तक चालीस पीर पर नमाज पढ़ेंगे, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। बोले - "हमारा मेन टारगेट मस्जिद कमाल मौला है, न कि चालीस पीर दरगाह। कोर्ट ने परिसर के आंगन में अलग एंट्री-एग्जिट के साथ जगह देने को कहा था।" यही वजह है कि धार भोजशाला में नमाज की जगह को लेकर मुस्लिम समाज और प्रशासन के बीच बैठक के बाद भी विवाद के चलते पुलिस फोर्स तैनात की गई है। कानूनी व्यवस्था को लेकर एएसपी विजय डाबर ने कहा 300 का बल लगाया गया है, कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस बल मौजूद रहेगा।

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